आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे

by Jan 6, 2026Shayaris

आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे

आ जाओ कि फिर देखने वाले न रहेंगे



जा शौक़ से लेकिन पलट आने के लिए जा

हम देर तलक ख़ुद को सँभाले न रहेंगे



ऐ ज़ौक़-ए-सफ़र ख़ैर हो नज़दीक है मंज़िल

सब कहते हैं अब पाँव में छाले न रहेंगे



जिन नालों की हो जाएगी ता-दोस्त रसाई

वो सानेहे बन जाएँगे नाले न रहेंगे



मैं तौबा तो कर लूँ मगर इक बात है वाइ’ज़

क्या आज से गर्दिश में पियाले न रहेंगे



क्यों ज़ुल्मत-ए-ग़म से हो ‘ख़ुमार’ इतने परेशान

बादल ये हमेशा ही तो काले न रहेंगे



ख़ुमार बाराबंकवी

khumar barabankvi shayar

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