एक ही दिन में सब नहीं हुआ ख़त्म

by Jan 6, 2026Shayaris

दिल बसे थे मगर उजड़ रहे थे

हम मुहब्बत की जंग लड़ रहे थे



इश्क़ के हाथ बुन रहे थे हमें

शक के हाथों से हम उधड़ रहे थे



इश्क़ भी उन दिनों ज़ियादा था

जिन दिनों हम ज़ियादा लड़ रहे थे



जिस्म पर उसके गुल खिले थे जहां

हम वहीं तितलियाँ पकड़ रहे थे



बात ऐसी के कोई बात न थी

हम उसी बात पर झगड़ रहे थे



एक ही दिन में सब नहीं हुआ ख़त्म

हम कई रोज़ से बिछड़ रहे थे



जिसने बर्बाद कर दिया हमको

हम उसी इश्क़ पर अकड़ रहे थे



गाँव में बारिशों का मौसम था

और हम मछलियाँ पकड़ रहे थे



तेरह चौदह बरस की उम्र थी वो

हम उसी उम्र में बिगड़ रहे थे



उसकी मर्ज़ी से चश्मा फूट पड़ा

हम तो बस एड़ियां रगड़ रहे थे



क़ाफ़िले का नसीब हिजरत था

खै़मे इक बार फिर उखड़ रहे थे



शकील आज़मी

Shakeel Azmi Lyricist Shayari

यह भी देखो

लेटैस्ट पोस्ट

पोस्ट शेर भी करते रहना

पोस्ट अच्छी लगी ? शेर कीजिए

फेमिली को, दोस्तों को शेर करने से हमें ज्यादा पोस्ट बनाने में उत्साह रहता है

Shakeel Azmi Lyricist Shayari

Know More

लेखक का परिचय

हर लेखकों और शायरों के परिचय के लिए पेज बन रहे है 

परिचय

यारी-मस्ती क्या है ?

मस्ती बिना यारी कहाँ ? मोज मस्ती का आलम दोस्ती में बना रहे इसलिए यहाँ कई तरह की कहानी, शायरी, जोक्स, टिप्स, जानकारी का संग्रह प्रस्तुति का काम जारी है, आते रहिए बार बार 

 

Send your Contents

Contribute Contents

Amazing Images

}

Prank ideas

Get approved as an Author