फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

by Jan 24, 2026Shayaris

होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते

साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते



पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी

आँखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते



दिल उजड़ी हुई एक सराए की तरह है

अब लोग यहाँ रात जगाने नहीं आते



यारो नए मौसम ने ये एहसान किए हैं

अब याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते



उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते



इस शहर के बादल तिरी ज़ुल्फ़ों की तरह हैं

ये आग लगाते हैं बुझाने नहीं आते



अहबाब भी ग़ैरों की अदा सीख गए हैं

आते हैं मगर दिल को दुखाने नहीं आते



बशीर बद्र

यह भी देखो

लेटैस्ट पोस्ट

पोस्ट शेर भी करते रहना

पोस्ट अच्छी लगी ? शेर कीजिए

फेमिली को, दोस्तों को शेर करने से हमें ज्यादा पोस्ट बनाने में उत्साह रहता है

Know More

लेखक का परिचय

हर लेखकों और शायरों के परिचय के लिए पेज बन रहे है 

परिचय

यारी-मस्ती क्या है ?

मस्ती बिना यारी कहाँ ? मोज मस्ती का आलम दोस्ती में बना रहे इसलिए यहाँ कई तरह की कहानी, शायरी, जोक्स, टिप्स, जानकारी का संग्रह प्रस्तुति का काम जारी है, आते रहिए बार बार 

 

Send your Contents

Contribute Contents

Amazing Images

}

Prank ideas

Get approved as an Author