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क़लंदर संगमरमर के मकानों में नहीं मिलता
मैं असली घी हूँ बनियों की दुकानों में नहीं मिलता
तो फिर दुनिया में मेरे चाहने वाले कहाँ होते?
ये अच्छा शेर है ये कारखानों मे नहीं मिलता
सगी बहनों का रिश्ता है जो उर्दू और हिंदी मे
कहीं दुनिया की दो ज़िन्दा ज़बानों में नहीं मिलता
पराये ग़म में अपने आप को बर्बाद कर लेना
ये जज़्बा अच्छे अच्छे ख़ानदानो मे नहीं मिलता
परिंदे शाम होते ही फ़ज़ा से लौट आते हैं
ज़मीं पर जो सुकूं है आसमानों में नहीं मिलता
यही बोयें यही जोतें यही सीचें यही काटें
तो फिर खुशहाल कोई क्यूँ किसानो मे नहीं मिलता?
अगर थोडे से भी इंसाफ़परवर लोग हो जाते
तो कोई बेगुनाह इन क़ैदखानो मे नहीं मिलता
मुनव्वर राना
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