by websmart | Feb 3, 2026 | Shayaris
वो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए लेकिन चलो इतना हुआ कुछ लोग पहचाने गए गर्मी-ए-महफ़िल फ़क़त इक नारा-ए-मस्ताना है और वो ख़ुश हैं कि इस महफ़िल से दीवाने गए मैं इसे शोहरत कहूँ या अपनी रुस्वाई कहूँ मुझ से पहले उस गली में मेरे अफ़्साने गए वहशतें कुछ इस तरह अपना...
by websmart | Jan 28, 2026 | Shayaris
सेहरा में रह के क़ैस ज़ियादा मज़े में है दुनिया समझ रही है कि लैला मज़े में है बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर मां सबसे कह रही है कि बेटा मज़े में है है रूह बेक़रार अभी तक यज़ीद की वो इसलिए कि आज भी प्यासा मज़े में है दुनिया अगर मज़ाक बदल दे तो और बात अब तक तो झूट...
by websmart | Jan 28, 2026 | Shayaris
लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं मय-कदा ज़र्फ़ के मेआ’र का पैमाना है ख़ाली शीशों की तरह लोग उछलते क्यूँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँ हैं नींद से मेरा तअल्लुक़ ही...
by websmart | Jan 24, 2026 | Shayaris
जो चाहती दुनिया है वो मुझ से नहीं होगा समझौता कोई ख़्वाब के बदले नहीं होगा अब रात की दीवार को ढाना है ज़रूरी ये काम मगर मुझ से अकेले नहीं होगा ख़ुश-फ़हमी अभी तक थी यही कार-ए-जुनूँ में जो मैं नहीं कर पाया किसी से नहीं होगा तदबीर नई सोच कोई ऐ दिल-ए-सादा माइल-ब-करम तुझ पे...
by websmart | Jan 24, 2026 | Shayaris
होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आँखों को अभी ख़्वाब छुपाने नहीं आते दिल उजड़ी हुई एक सराए की तरह है अब लोग यहाँ रात जगाने नहीं आते यारो नए मौसम ने ये एहसान किए हैं अब याद मुझे दर्द पुराने...