Shayaris Articles

फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते

भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है

भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है
मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है

मैं असली घी हूँ बनियों की दुकानों में नहीं मिलता

क़लंदर संगमरमर के मकानों में नहीं मिलता
मैं असली घी हूँ बनियों की दुकानों में नहीं मिलता

रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा

मुझ को चलने दो अकेला है अभी मेरा सफ़र
रास्ता रोका गया तो क़ाफ़िला हो जाऊँगा

रात को ओढ़ के सो जाता हूँ

दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ मैं तिरी यादों का एहराम पहन लेता हूँ मेरे घर वाले भी तकलीफ़ में आ जाते हैं मैं जो कुछ...

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