होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आँखों को...
होंटों पे मोहब्बत के फ़साने नहीं आते साहिल पे समुंदर के ख़ज़ाने नहीं आते पलकें भी चमक उठती हैं सोते में हमारी आँखों को...
भुला पाना बहुत मुश्किल है सब कुछ याद रहता है मोहब्बत करने वाला इस लिए बरबाद रहता है अगर सोने के पिंजड़े में भी रहता है...
क़लंदर संगमरमर के मकानों में नहीं मिलता मैं असली घी हूँ बनियों की दुकानों में नहीं मिलता तो फिर दुनिया में मेरे चाहने...
आंखों ने कैसे ख़्वाब तराशे हैं इन दिनों दिल पर अजीब रंग उतरते हैं इन दिनों रख अपने पास अपने महो-मेह्र ऐ फ़लक हम ख़ुद...
हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते अब ग़म-ए-ज़ीस्त से घबरा के कहाँ जाएँगे उम्र गुज़री...
दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ मैं तिरी यादों का एहराम पहन लेता हूँ मेरे घर वाले भी तकलीफ़ में आ जाते हैं मैं जो कुछ...
हमारे शहर-ए-अदब में चली हवा क्या है ये कैसा दौर है यारब हमें हुआ क्या है उसी ने आग लगाई है सारी बस्ती में वही ये पूछ...
सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं हम पे जो बीत चुकी है वो कहाँ लिक्खा...
आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे आ जाओ कि फिर देखने वाले न रहेंगे जा शौक़ से लेकिन पलट आने के लिए जा हम देर तलक...
दिल बसे थे मगर उजड़ रहे थे हम मुहब्बत की जंग लड़ रहे थे इश्क़ के हाथ बुन रहे थे हमें शक के हाथों से हम उधड़ रहे थे...
शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था जिस्म जल...
रात के बाद नए दिन की सहर आएगी दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी हँसते हँसते कभी थक जाओ तो छुप के रो लो ये हँसी भीग के...