जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा...
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा...
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब-ए-दुश्मनाँ...
तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारे बाद भला क्या हैं वादा-ओ-पैमाँ बस...
वो आएगा नुमाइश ए सामान देखकर क्यों कारोबार छोड़ दूं नुक़सान देखकर नख़रे उठा रही हूं तुम्हारी तलाश के रुकती नहीं हूं...
नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है मिलने-जुलने वालों में तो सब...
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो आँखों में नमी हँसी लबों पर क्या हाल है क्या दिखा रहे हो बन...
साथ देने का दिलाया था भरोसा तू ने और फिर छोड़ दिया मुझ को अकेला तू ने अपनी मर्ज़ी से मुझे छोड़ के जाने वाले मेरी...
ज़िंदगी-भर एक ही कार-ए-हुनर करते रहे इक घरौंदा रेत का था जिस को घर करते रहे हम को भी मा'लूम था अंजाम क्या होगा मगर...
ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर ...
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं दबा दबा सा सही दिल में प्यार है कि नहीं तू अपने दिल की जवाँ धड़कनों को गिन के...
ख़ुशियों के तराने में ज़रा देर लगेगी रूठे हैं मनाने में ज़रा देर लगेगी तुम सामने आ जाओ तो आंखों में बिठा लूं तस्वीर...
ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं और क्या जुर्म है पता ही नहीं इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं मेरे हिस्से में कुछ बचा ही...