आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे
आ जाओ कि फिर देखने वाले न रहेंगे
मस्ती बिना यारी कहाँ
एक ही दिन में सब नहीं हुआ ख़त्म
दिल बसे थे मगर उजड़ रहे थे
हम मुहब्बत की जंग लड़ रहे थे
शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा
शोर यूँ ही न परिंदों ने मचाया होगा कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो था जिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा बानी-ए-जश्ने-बहाराँ ने ये सोचा भी नहीं किस ने काटों को लहू अपना पिलाया होगा अपने जंगल से जो घबरा के उड़े थे प्यासे ये सराब उन...
दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी
रात के बाद नए दिन की सहर आएगी
दिन नहीं बदलेगा तारीख़ बदल जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी
मुख़्तसर होते हुए भी ज़िंदगी बढ़ जाएगी
माँ की आँखें चूम लीजे रौशनी बढ़ जाएगी
तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं
तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं
कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों से वाबस्ता अफ़्साने हज़ारों हैं
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा
महबूब का घर हो कि बुज़ुर्गों की ज़मीनें
जो छोड़ दिया फिर उसे मुड़ कर नहीं देखा
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