हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते

by Jan 14, 2026Shayaris

हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते

अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते



अब ग़म-ए-ज़ीस्त से घबरा के कहाँ जाएँगे

उम्र गुज़री है इसी आग में जलते जलते



रात के बाद सहर होगी मगर किस के लिए

हम ही शायद न रहें रात के ढलते ढलते



रौशनी कम थी मगर इतना अँधेरा तो न था

शम्मा-ए-उम्मीद भी गुल हो गई जलते जलते



आप वादे से मुकर जाएँगे रफ़्ता रफ़्ता

ज़ेहन से बात उतर जाती है टलते टलते



टूटी दीवार का साया भी बहुत होता है

पाँव जल जाएँ अगर धूप में चलते चलते



दिन अभी बाक़ी है ‘इक़बाल’ ज़रा तेज़ चलो

कुछ न सूझेगा तुम्हें शाम के ढलते ढलते



इक़बाल अज़ीम

iqbal azeem

यह भी देखो

लेटैस्ट पोस्ट

पोस्ट शेर भी करते रहना

पोस्ट अच्छी लगी ? शेर कीजिए

फेमिली को, दोस्तों को शेर करने से हमें ज्यादा पोस्ट बनाने में उत्साह रहता है

iqbal azeem

Know More

लेखक का परिचय

हर लेखकों और शायरों के परिचय के लिए पेज बन रहे है 

परिचय

यारी-मस्ती क्या है ?

मस्ती बिना यारी कहाँ ? मोज मस्ती का आलम दोस्ती में बना रहे इसलिए यहाँ कई तरह की कहानी, शायरी, जोक्स, टिप्स, जानकारी का संग्रह प्रस्तुति का काम जारी है, आते रहिए बार बार 

 

Send your Contents

Contribute Contents

Amazing Images

}

Prank ideas

Get approved as an Author