by websmart | Jan 15, 2026 | Shayaris
जब प्यार नहीं है तो भुला क्यूँ नहीं देते ख़त किस लिए रक्खे हैं जला क्यूँ नहीं देते किस वास्ते लिक्खा है हथेली पे मिरा नाम मैं हर्फ़-ए-ग़लत हूँ तो मिटा क्यूँ नहीं देते लिल्लाह शब-ओ-रोज़ की उलझन से निकालो तुम मेरे नहीं हो तो बता क्यूँ नहीं देते रह रह के न तड़पाओ ऐ...
by websmart | Jan 15, 2026 | Shayaris
दयार-ए-दिल की रात में चराग़ सा जला गया मिला नहीं तो क्या हुआ वो शक्ल तो दिखा गया वो दोस्ती तो ख़ैर अब नसीब-ए-दुश्मनाँ हुई वो छोटी छोटी रंजिशों का लुत्फ़ भी चला गया जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया पुकारती हैं फ़ुर्सतें...
by websmart | Jan 15, 2026 | Shayaris
तुम्हारा हिज्र मना लूँ अगर इजाज़त हो मैं दिल किसी से लगा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारे बाद भला क्या हैं वादा-ओ-पैमाँ बस अपना वक़्त गँवा लूँ अगर इजाज़त हो तुम्हारे हिज्र की शब हाए कार में जानाँ कोई चिराग़ जला लूँ अगर इजाज़त हो जुनूँ वही है वही है मगर है शहर नया यहाँ भी...
by websmart | Jan 14, 2026 | Shayaris
आंखों ने कैसे ख़्वाब तराशे हैं इन दिनों दिल पर अजीब रंग उतरते हैं इन दिनों रख अपने पास अपने महो-मेह्र ऐ फ़लक हम ख़ुद किसी की आँख के तारे हैं इन दिनों दस्ते-सेहर ने मांग निकाली है बारहां और शब ने आ के बाल संवारे हैं इन दिनों इस इश्क ने हमें ही नहीं मोतदिल किया उसकी भी...
by websmart | Jan 14, 2026 | Shayaris
हम बहुत दूर निकल आए हैं चलते चलते अब ठहर जाएँ कहीं शाम के ढलते ढलते अब ग़म-ए-ज़ीस्त से घबरा के कहाँ जाएँगे उम्र गुज़री है इसी आग में जलते जलते रात के बाद सहर होगी मगर किस के लिए हम ही शायद न रहें रात के ढलते ढलते रौशनी कम थी मगर इतना अँधेरा तो न था शम्मा-ए-उम्मीद भी...