by websmart | Jan 13, 2026 | Shayaris
दिन उतरते ही नई शाम पहन लेता हूँ मैं तिरी यादों का एहराम पहन लेता हूँ मेरे घर वाले भी तकलीफ़ में आ जाते हैं मैं जो कुछ देर को आराम पहन लेता हूँ रात को ओढ़ के सो जाता हूँ दिन-भर की थकन सुब्ह को फिर से कई काम पहन लेता हूँ जब भी परदेस में याद आता है घर का नक़्शा मैं...
by websmart | Jan 11, 2026 | Shayaris
हमारे शहर-ए-अदब में चली हवा क्या है ये कैसा दौर है यारब हमें हुआ क्या है उसी ने आग लगाई है सारी बस्ती में वही ये पूछ रहा है कि माजरा क्या है ये तेरा ज़र्फ़ कि तू फिर भी बद-गुमाँ न हुआ सिवाए दर्द के मैं ने तुझे दिया क्या है लपक के छीन ले हक़ अपना कम-सवादों से बढ़ा के...
by websmart | Jan 11, 2026 | Shayaris
सरफिरे लोग हमें दुश्मन-ए-जाँ कहते हैं हम जो इस मुल्क की मिट्टी को भी माँ कहते हैं हम पे जो बीत चुकी है वो कहाँ लिक्खा है हम पे जो बीत रही है वो कहाँ कहते हैं वैसे ये बात बताने की नहीं है लेकिन हम तेरे इश्क़ में बरबाद हैं हाँ कहते हैं तुझको ऐ ख़ाक-ए-वतन मेरे तयम्मुम की...
by websmart | Jan 6, 2026 | Shayaris
आँखों के चराग़ों में उजाले न रहेंगे आ जाओ कि फिर देखने वाले न रहेंगे जा शौक़ से लेकिन पलट आने के लिए जा हम देर तलक ख़ुद को सँभाले न रहेंगे ऐ ज़ौक़-ए-सफ़र ख़ैर हो नज़दीक है मंज़िल सब कहते हैं अब पाँव में छाले न रहेंगे जिन नालों की हो जाएगी ता-दोस्त रसाई वो सानेहे बन...
by websmart | Jan 6, 2026 | Shayaris
दिल बसे थे मगर उजड़ रहे थे हम मुहब्बत की जंग लड़ रहे थे इश्क़ के हाथ बुन रहे थे हमें शक के हाथों से हम उधड़ रहे थे इश्क़ भी उन दिनों ज़ियादा था जिन दिनों हम ज़ियादा लड़ रहे थे जिस्म पर उसके गुल खिले थे जहां हम वहीं तितलियाँ पकड़ रहे थे बात ऐसी के कोई बात न थी हम उसी...