by websmart | Dec 19, 2025 | Shayaris
नई नई आँखें हों तो हर मंज़र अच्छा लगता है कुछ दिन शहर में घूमे लेकिन अब घर अच्छा लगता है मिलने-जुलने वालों में तो सब ही अपने जैसे हैं जिस से अब तक मिले नहीं वो अक्सर अच्छा लगता है मेरे आँगन में आए या तेरे सर पर चोट लगे सन्नाटों में बोलने वाला पत्थर अच्छा लगता है चाहत...
by websmart | Dec 16, 2025 | Shayaris
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो क्या ग़म है जिस को छुपा रहे हो आँखों में नमी हँसी लबों पर क्या हाल है क्या दिखा रहे हो बन जाएँगे ज़हर पीते पीते ये अश्क जो पीते जा रहे हो जिन ज़ख़्मों को वक़्त भर चला है तुम क्यूँ उन्हें छेड़े जा रहे हो रेखाओं का खेल है मुक़द्दर रेखाओं से...
by websmart | Dec 14, 2025 | Shayaris
साथ देने का दिलाया था भरोसा तू ने और फिर छोड़ दिया मुझ को अकेला तू ने अपनी मर्ज़ी से मुझे छोड़ के जाने वाले मेरी मर्ज़ी को कहाँ छोड़ दिया था तू ने हाए अफ़सोस तुझे अब भी ये मालूम नहीं ज़िंदगी मेरी बना दी है तमाशा तू ने जैसे-तैसे मैं बिना रोए चली जाती मगर किस लिए देख...
by websmart | Dec 6, 2025 | Shayaris
ज़िंदगी-भर एक ही कार-ए-हुनर करते रहे इक घरौंदा रेत का था जिस को घर करते रहे हम को भी मा’लूम था अंजाम क्या होगा मगर शहर-ए-कूफ़ा की तरफ़ हम भी सफ़र करते रहे उड़ गए सारे परिंदे मौसमों की चाह में इंतिज़ार उन का मगर बूढे शजर करते रहे यूँ तो हम भी कौन सा ज़िंदा रहे इस...
by websmart | Dec 2, 2025 | Shayaris
ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर दर्द हीरा है दर्द मोती है दर्द आँखों से मत बहाया कर चाँद ला कर कोई नहीं देगा अपने चेहरे से जगमगाया कर धूप मायूस लौट जाती है छत पे कपड़े सुखाने आया कर...